पिछले अंक में आपने पढ़ा कि किस प्रकार मैं अनेक मुसीबतों से एक साथ घिर गया तथा अपने आप को बहुत बड़ा भगवान का भक्त समझने वाला मैं घबरा उठा पिछले अंक को पुनः पढने के लिये इस लिकं पर जाईये
Sai Baba mujhse Bole Part 1

मेरा मूल कार्य वसूली से संबधित है हालांकि यह कार्य मेरे स्वभाव से मेल नहीं खाता पर मेरी आजीविका इसी प्रकार की है टी.आर.ए को विभिन्न सरकारी बकाया बैंको के लोन वित निगमों के लोन जो नहीं चुकाते उन भले लोगों से वसूली करनी पड़ती है साथ ही किसानों से लगान व लोन आदि की वसूली पर नियत्रंण का कार्य टी.आर.ए के पास होता है इसलिए मेरे नवपदस्थापन पर कार्य ग्रहण करने के बाद एक तरफ तो मैं बुरी तरह बीमार होकर काम नहीं कर पा रहा था क्यों कि इस स्थान की विशेषता यही थी कि यहां जो आया वो या तो बीमार होकर उपर चला गया या अस्पतालों में सड़ता रहा यहां आने के कुछ ही समय बाद इसी अभिशाप के चलते मुझे अस्पताल में दाखिल होना पड़ा तथा फिर मेरे कूल्हे पर अनेक फुंसिया व दर्द तथा पीप से भरे फोड़े हो गये जिन पर जितने भी एंटीबायोटिक मैं जानता था असर नहीं कर रहे थे।

जिससे मेरे बॉस व सहकर्मि भी डरकर असहयोग करने लगे अब केमिकल लोचे पर वापस आते हैं।
यहां में एक बात रहस्य ही रखना चाहुगां कि यह केमिकल लोचा प्रत्यक्ष था या सपना था? सच था या झूठी कहानी है? केवल मन में उठे विचार है या उससे उपर का कोई स्तर है साथ ही कुछ अशों को मैने संपादित भी कर दिया है।इसलिये इन सब का निर्णय पाठक स्वंय कर लेवें ।
तो एक दिन ज्यादा चीख पुकार मचाने पर केमिकल लोचा हो ही गया सांई बाबा मुझसे बोले
क्यों व्यर्थ पुकार मचा रहा है तुझे क्या संकट है वस्तुतः यह सब दुख तेरे मन की स्थिति से बने हुये हैं?
सभी रोगों का मूल कारण आहार विहार में अनियमितता व पूर्व जन्म के पापों का फल है।
अब मुझे विश्वास हो गया कि यह केमिकल लोचा ही है क्यों कि दोनों बातें कैसे संभव है या तो मेरा रोग आहार विहार से हुआ है या पूर्व जन्म के पापों से अतः मैने निवेदन किया कि आप एक बात बताएं दोहरे अर्थ की बातों से तो मैं ओर भी कन्फयूज हो रहा हूं।
बाबा ने कहा वस्तूत पूर्व जन्म या इस जन्म के पापकर्म ही सभी दुखों का मूल होते हैं परन्तु अकेले इनसे रोग नहीं होते यह पापकर्म मन में आहार विहार गलत करने की इच्छा उत्पन्न कर देता है तूं याद कर कि विगत मौसम में तैने लगभग रोज आम व आईसक्रीम तथा सरसों के तेल का सेवन किया है इसके परिणाम से यह फोड़े फुंसिंया है अब सभी प्रकार का मीठा खाना कुछ दिन तक त्याग कर तथा सरसों के तेल से बने प्रदार्थ का त्याग कर फिर एंटीबायोटिक का प्रयोग कर तो नई फुंसिया होनी बंद हो जावेगी।
अपने आप को कर्ता मानना बंद कर तथा ईश्वर की इच्छा से स्वतः होने वाले कर्मों को कर अंहकार का परित्याग करके तुं अपना कार्य इमानदारी से कर फिर कोई बात होगी तो मुझे देखनी है।
शेष अगले अंक में।
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केमिकल लोचा-सांई बाबा मुझसे बोले ???? पार्ट तृतीय
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